आज खरना पर यूं शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से करें पूजा

29 Mar, 2020 14:45 IST|Sakshi
खरना पर यू शुभ मुहूर्त में करें पूजा

आज चैती छठ का दूसरा दिन खरना है

खरना का पर्व शुद्धता का प्रतीक होता है

इस दिन शाम में पूजा भी की जाती है

चैती छठ की शुरुआत कल से यानी 28 मार्च शनिवार को नहाय-खाय के साथ हो चुकी है। आज रविवार को खरना है। व्रतियों ने सुबह गंगा स्नान करने के बाद अपने घर में मिट्टी का चुल्हा बनाया और उसमें कद्दू -भात बना कर नहाए- खाय मनाया। अब 29 मार्च को यानी कि आज खरना किया जाएगा जिसमें छठी मईया को कई खास पकवान का भोग लगाया जाता है।

कुछ ऐसे संपन्न हुआ नहाय- खाय

सूर्योपासना व आस्था का महापर्व चैती छठ शनिवार से प्रारंभ हो चुका है। इस दिन नहाय- खाय किया गया। फिर व्रतियों ने शनिवार को सुबह गंगा स्नान करने के बाद अपने घर में मिट्टी का चूल्हा बनाया। इसके उपरांत उसमें कद्दू- भात तैयार कर छठी मैया को भोग लगाया। इसके बाद व्रतियों ने खुद प्रसाद ग्रहण किया। इन सबके बाद लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया।

खरना का पर्व शुद्धता का प्रतीक होता है। ऐसे में छठ पूजा पर हमें शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वैसे खरना का वास्तविक अर्थ शुद्धिकरण होता है। व्रती इस दिन उपवास करते हैं और संध्याकाल में पूजा आराधना करने के बाद भोजन ग्रहण करते हैं। धार्मिक मान्यता अनुसार जो व्रती शुद्धता और सत्यता से मां छठी और भगवान भास्कर की पूजा आराधना करते हैं, उनको मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

खरना का महत्व

चैती छठ का अति विशेष महत्व है। यह व्रत संतान प्राप्ति और संतान की रक्षा के लिए किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि महाभारत काल में द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा के लिए छठ पूजा की थी। उस समय से छठ पूजा करने की प्रथा है। इस व्रत को करने से नि:संतानों को यथाशीघ्र संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही व्रती को सुख, आरोग्य और एश्वर्य प्राप्त होता है।

खरना का शुभ मुहूर्त

आस्था के महापर्व चैती छठ पूजा के खरना का शुभ समय आज शाम में 6 बजकर 20 मिनट से रात्रि 8 बजकर 55 मिनट तक है। इस समयावधि के दौरान खरना पूजा अर्चना करना विशेष फलदायी है।

ऐसे करें खरना पर पूजा 

इस दिन व्रती को सुबह में उठकर घर की अच्छी तरीके से साफ-सफाई करनी चाहिए। इसके बाद स्नान-ध्यानकर व्रत का संकल्प लें। फिर भगवान भास्कर को जल का अर्घ्य दें। इस दिन निर्जला उपवास रखें। इसके बाद संध्याकाल में फिर से स्नान करें और छठी मैया की पूजा करें। छठी मैया को प्रसाद मेंं ठेकुआ, खीर-पूरी आदि अर्पित करें। जब पूजा संपन्न हो जाए तो प्रसााद को ग्रहण करें। इसके बाद घर के लोग प्रसाद प्राप्त कर सकते हैं। सोमवार 30 मार्च को संध्या अर्घ्य और 31 मार्च को सुबह का अर्घ्य है।

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