आज खरना पर ऐसे करेंगे व्रत-पूजा तो प्रसन्न होंगी छठी मैया, यूं बनाया जाता है खास प्रसाद

19 Nov, 2020 09:05 IST|मीता
छठ के दूसरा दिन खरना

छठ का दूसरा दिन होता है खरना 

खरना पर होती है खास पूजा 

इस दिन बनता है विशेष प्रसाद 

आज छठ (Chhath Puja) का दूसरा दिन है जिसे खरना (Kharna) कहते हैं। खास बात यह है कि आज के दिन बेहद शुभ संयोग बन रहा है। बता दें, छठ महापर्व पर रवि योग का ऐसा संयोग बना है जो नहाय खाय से लेकर 21 नवंबर तक चलेगा। 

इस बार शुभ योग में सूर्य भगवान को संध्या कालीन अर्घ्य भी दिया जाएगा। इस त्योहार को लोग परिवारिक सुख-समृद्धि के लिए मनाते हैं। इस दिन व्रत रखने वाली स्त्रियां शाम को स्नान करके विधि-विधान से रोटी और गुड़ की खीर का प्रसाद बनाती हैं।

छठ व्रती छठी मैया को खुश करने के लिए चार चीजों का सेवन करते हैं। छठ महापर्व का दूसरा दिन जिसे खरना के नाम से जाना जाता है, कहीं-कहीं लोग इसे लोहंडा भी कहते हैं। इस दिन छठी व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं। खरना के दिन व्रती अन्न तो दूर की बात है सूर्यास्त से पहले पानी की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करती हैं।

खरना के शाम को चावल और गुड़ या गन्ने के रस का प्रयोग करके खीर बनाते हैं। छठ व्रती के लिए खाना बनाने में नमक और चीनी का प्रयोग बिल्कुल नहीं किया जाता है। इन्हीं दो चीजों को छठी मैया को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। उसके बाद छठ व्रती घर के एकांत में रहकर उसे ग्रहण करते हैं।

प्रसाद ग्रहण करने के समय परिवार के सभी सदस्य उस समय घर से बाहर चले जाते हैं क्योंकि एकांत में प्रसाद ग्रहण करते समय छठ व्रती को किसी तरह की अवाज सुनना पर्व के विरूद्ध माना जाता है।

खरना की पूजा विधि 

खरना के दिन छठ का व्रत करने वाली महिलाएं सुबह स्नान करके साफ सुथरे वस्त्र धारण करती हैं और नाक से माथे के मांग तक सिंदूर लगाती हैं। खरना के दिन व्रती दिन भर व्रत रखती हैं और शाम के समय लकड़ी के चूल्हे पर साठी के चावल और गुड़ की खीर बनाकर प्रसाद तैयार करती हैं। फिर सूर्य भगवान की पूजा करने के बाद व्रती महिलाएं इस प्रसाद को ग्रहण करती हैं। उनके खाने के बाद ये प्रसाद घर के बाकी सदस्यों में बांटा जाता है। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद ही व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। मान्यता है कि खरना पूजा के बाद ही घर में देवी षष्ठी (छठी मैया) का आगमन हो जाता है।

खीर के अतिरिक्त पूजा के प्रसाद में मूली, केला भी रखा जाता है। खरना के दिन मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर प्रसाद तैयार किया जाता है। छठ व्रती महिलाएं भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना करने के बाद एकांत में प्रसाद ग्रहण करती हैं।

खरना का महत्व

इस दिन व्रती शुद्ध मन से सूर्य देव और छठ मां की पूजा करके गुड़ की खीर का भोग लगाती हैं। खरना का प्रसाद काफी शुद्ध तरीके से बनाया जाता है। खरना के दिन जो प्रसाद बनता है, उसे नए चूल्हे पर बनाया जाता है। व्रती इस खीर का प्रसाद अपने हाथों से ही पकाती हैं।

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खरना के दिन व्रती महिलाएं सिर्फ एक ही समय भोजन करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से शरीर से लेकर मन तक शुद्ध हो जाता है। 

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