बसंत पंचमी पर यूं शुभ मुहूर्त में करें सरस्वती पूजा, मिलेगा ज्ञान का वरदान

2 Mar, 2021 10:17 IST|मीता
सोशल मीडिया के सौजन्य से

बसंत पंचमी का महत्व व शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी पर ऐसे करें सरस्वती पूजा 

माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी (Basant panchami) मनाई जाती है। इसी दिन से भारत में वसंत ऋतु का आरम्भ होता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा (Saraswati Puja) का विधान है। बसंत पंचमी की पूजा सूर्योदय के बाद और दिन के मध्य भाग से पहले की जाती है। इस समय को पूर्वाह्न भी कहा जाता है।

इस बार 16 फरवरी, मंगलवार को है। इस दिन मंदिरों में ही नहीं बल्कि घरों व शिक्षण संस्थानों में भी देवी सरस्वती की पूजा की जाती है क्योंकि विद्या और बुद्धि को प्रदान करने वाली देवी सरस्वती ही है।बसंत पंचमी से ही वसंत ऋतु का आरंभ माना जाता है और वसंत को ऋतुओं का राजा भी माना जाता है। इस मौसम में न तो अधिक गर्मी होती है और न ही अधिक ठंड।

बसंत पंचमी शुभ मुहूर्त


माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का प्रारंभ 16 फरवरी को तड़के 03 बजकर 36 मिनट पर हो रहा है, जो 17 फरवरी दिन बुधवार को सुबह 05 बजकर 46 मिनट तक है। 
ऐसे में बसंत पंचमी का त्योहार 16 फरवरी को ही मनाया जाएगा।

सरस्वती पूजा का मुहूर्त


बसंत पंचमी के दिन आपको माता सरस्वती की पूजा के लिए कुल 05 घंटे 37 मिनट का समय मिलेगा। आपको इसके मध्य ही सरस्वती पूजा करनी चाहिए। 
16 फरवरी को सुबह 06 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट के बीच सरस्वती पूजा का मुहूर्त बन रहा है।

ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा

- इस दिन प्रात:काल स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें तत्पश्चात क्लश स्थापित कर भगवान गणेश व नवग्रह की विधिवत पूजा करें। 

- फिर मां सरस्वती की पूजा करें। मां की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन व स्नान कराएं। फिर माता का शृंगार कराएं। माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं। 

- प्रसाद के रुप में खीर अथवा दुध से बनी मिठाईयां चढ़ा सकते हैं। श्वेत फूल माता को अर्पण किये जा सकते हैं। विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा कर गरीब बच्चों में कलम व पुस्तकों का दान करें। 

- संगीत से जुड़े व्यक्ति अपने साज पर तिलक लगा कर मां की आराधना कर सकते हैं व मां को बांसुरी भेंट कर सकते हैं।

- पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन बनाएं और देवी सरस्वती को इसका भोग लगाकर स्वयं भी इसे ग्रहण करें।

क्यों खास है बसंत पंचमी


- बसंत पंचमी के दिन माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की शुरुआत के लिए शुभ मानते हैं। ज्योतिष के अनुसार तो इस दिन बच्चे की जिह्वा पर शहद से ए बनाना चाहिए इससे बच्चा ज्ञानवान होता है व शिक्षा जल्दी ग्रहण करने लगता है।


- बच्चों को उच्चारण सिखाने के लिहाज से भी यह दिन बहुत शुभ माना जाता है।


- 6 माह पूरे कर चुके बच्चों को अन्न का पहला निवाला भी इसी दिन खिलाया जाता है।


-बसंत ऋतु प्रेम की ऋतु मानी जाती है और कामदेव अपने बाण इस ऋतु में चलाते हैं इस लिहाज से अपने परिवार के विस्तार के लिए भी यह ऋतु बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए बसंत पंचमी को परिणय सूत्र में बंधने के लिए भी बहुत सौभाग्यशाली माना जाता है व बहुत से युगल इस दिन अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत करते हैं।

-गृह प्रवेश से लेकर नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी इस दिन को शुभ माना जाता है। इस दिन कई लोग पीले वस्त्र धारण कर पतंगबाजी भी करते हैं।

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बेहद शुभ दिन होता है वसंत पंचमी

ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए यह सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।

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