बॉलीवुड में जगह बनाने के लिए प्रतिभा से ज्यादा जरूरी है आज टैलेंट मैनेजमेंट

30 Nov, 2020 12:21 IST|सुषमाश्री
अमृता राव

आज सोशल मीडिया और पीआर मशीनरी का है जमाना

मैंने ट्रांजिशन पीरियड में उद्योग में किया प्रवेश

जब फोटोग्राफर ने मुझे कहा था 'संजना'

मुंबई: 'मैं हूं ना' से लेकर 'विवाह' तक, कितनी ही बेहतरीन फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों का प्यार और आलोचकों की प्रशंसा पा चुकीं बॉलीवुड (Bollywood) अभिनेत्री अमृता राव (Amrita Rao) ने इंडस्ट्री में आए एक ऐसे बदलाव की ओर इशारा किया है, जिसका असर आज ज्यादातर कलाकारों की जिंदगी में देखने को मिल रहा है।

बता दें कि साल 2002 में अमृता राव ने अपने करियर की शुरुआत की थी। तब से अब तक बॉलीवुड में आए बदलावों की तुलना की जाए तो कहा जा सकेगा कि कलाकारों के लिए विजिविलिटी की अवधारणा ने सोशल मीडिया और टैलेंट मैनेजमेंट फर्मों (Talent Management Firms) को बदल दिया है।

आज सोशल मीडिया और पीआर मशीनरी का है जमाना

अमृता ने कहा, "हम इन दिनों जो सोशल मीडिया और पीआर मशीनरी देख रहे हैं, इस युग से पहले एक कलाकार की लोकप्रियता और सेलिब्रिटी की स्थिति अभिनेता या अभिनेत्री की प्रतिभा की बाइप्रो़डक्ट थी। जब मैंने एक किशोरी के रूप में उद्योग में प्रवेश किया और 'इश्क विश्क', 'मस्ती' और 'मैं हूं ना' जैसी फिल्मों में दिखाई दी तो लोगों ने मेरे प्रदर्शन के कारण मुझे देखा, हालांकि 'मैं हूं ना' जैसी फिल्मों में शाहरुख खान और सुष्मिता सेन जैसे सुपरस्टार के बीच अपनी पहचान बना पाना आसान नहीं था।"

मैंने ट्रांजिशन पीरियड में उद्योग में किया प्रवेश

अमृता ने आगे कहा, "इन दिनों अभिनेता सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति के कारण भी लोकप्रिय हो रहे हैं। मुझे लगता है कि एक अभिनेता के लिए उसके निभाए हुए किसी एक चरित्र और फिल्म के जरिये याद किया जाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।"

अमृता बोलीं, "सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हस्ती बनने में कोई बुराई नहीं है, बस एक बड़ा बदलाव हुआ है। मैंने ट्रांजिशन पीरियड के दौरान उद्योग में प्रवेश किया। इससे पहले, प्रतिभा का होना महत्वपूर्ण था और एक कलाकार के रूप में, हम अपने कौशल को बेहतर करते थे। अब टैलेंट मैनेजमेंट जैसी चीजें भी हैं। एक तरह से यह एक अच्छा सांस्कृतिक परिवर्तन है, जो कलाकारों को नौकरी के अवसर के साथ अधिक सुरक्षित महसूस कराता है।"

जब फोटोग्राफर ने मुझे कहा था 'संजना'

क्या अमृता उस पल को याद कर सकती हैं, जब उन्हें सोशल मीडिया युग से पहले पहचाना गया था? इस पर उन्होंने कहा, "हां, मुझे स्पष्ट रूप से याद है कि क्योंकि मेरी भावनाएं मिली जुली थीं। जब भी मैं इसे याद करती हूं, यह मेरे चेहरे पर एक मुस्कान लाता है। एक बार हम सभी कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश कर रहे थे और फोटोग्राफर वहां मौजूद थे, वह 'मैं हूं ना' की सफलता की पार्टी का अवसर था।

"वहां कॉलेज के छात्रों का एक समूह खड़ा था, जिन्होंने मुझे देखा और मुझे 'संजना' कहा। मैं बहुत युवा थी, तब मुझे नहीं पता था कि मैं कैसे प्रतिक्रिया दूं, मैं मुस्कुराई, अपने चेहरे पर हथेली रख ली, क्योंकि मुझे शर्म आ रही थी। मेरे दिमाग में यह घूम रहा था कि 'क्या ऐसा होता है?' इसका मतलब है कि उन्होंने वास्तव में मेरी फिल्म देखी और मुझे पहचाना।"
-आईएएनएस

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