जीवन : फिल्म इंडस्ट्री का ऐसा विलेन, जिसने 60 फिल्मों में किया था नारद मुनि का रोल

23 Oct, 2020 19:25 IST|अनूप कुमार मिश्रा
अभिनेता जीवन (सौ. सोशल मीडिया)

अभिनेता जीवन का जन्म 24 अक्टूबर को कश्मीर में हुआ था

जीवन 24 भाई-बहन थे, माता का निधन जन्म के वक्त हो गया था

जीवन ने अलग-अलग भाषाओं में करीब 60 फिल्मों में नारद मुनि का रोल किया था

मुंबई : फिल्म इंडस्ट्री में विलेन के किरदार को एक नई पहचान देने का श्रेय अभिनेता जीवन को जाता है। उन्होंने विलेन के किरदार को कॉमेडी के साथ ऐसे जोड़ा कि वह एक ट्रेंड बन गया, जिसे बाद में कादर खान, शक्ति कपूर और परेश रावल ने भी बखूबी निभाया। जीवन के जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ ऐसी ही दिलचस्प बातें।

जीवन का असली नाम ओंकार नाथ धर था। उनका जन्म 24 अक्टूबर 1915 को कश्मीर में हुआ था। जीवन की असल जिंदगी काफी संघर्ष भरी रही थी। वह 24 भाई-बहन थे। मां का साया जन्म के साथ ही उठ गया, जबकि पिता का देहांत भी उस वक्त हो गया, जब उनकी उम्र महज तीन साल थी। बचपन से ही जीवन को फिल्मों में एक्टिंग का बहुत शौक था। इसी शौक ने उन्हें मायानगरी मुंबई पहुंचा दिया।

26 रुपये लेकर पहुंचे थे मुंबई

जीवन का परिवार काफी बड़ा था। जिम्मेदारी और माहौल ऐसा था कि वह अपने एक्टिंग के शौक को पूरा नहीं कर पा रहे थे। आखिरकार उन्होंने फैसला किया और 18 साल की उम्र में वह मुंबई आ गए। मुंबई आते वक्त उनकी जेब में 26 रुपये थे। शुरुआती दिनों के स्ट्रगल और भागदौड़ में उन्हें यह रुपये काफी काम आए थे।

मोहनलाल ने दिया पहला मौका

जीवन ने अपना खर्च चलाने के लिए डायरेक्टर मोहनलाल के स्टूडियों में काम करना शुरू कर दिया। वहां काम करने वाले अन्य लोगों को इस बात की जानकारी थी कि जीवन एक्टिंग भी करते हैं और उन्हें शौक है। इस बात की खबर मोहनलाल को लगी। उस वक्त वह जाने-माने डायरेक्टर हुआ करते थे। उन्होंने जीवन को एक्टिंग का पहला मौका अपनी फिल्म 'फैशनेबल इंडिया' में दिया।

60 फिल्मों में किया नारद मुनि का रोल

जीवन से जुड़ी सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अलग-अलग भाषाओं की करीब 60 फिल्मों में नारद मुनि का रोल निभाया। नारद मुनि के किरदार में जीवन इतना फिट बैठते थे कि इंडस्ट्री में कहा जाता था कि अगर स्वर्ग से सही में नारद मुनि धरती पर आ जाएं तब भी जीवन की तरह 'नारायण-नारायण' नहीं कह सकते। जीवन को पहचान 1935 में आई फिल्म रोमांटिक इंडिया से मिली थी।

खलनायक के रोल को दी नई पहचान

उस वक्त के दौर में खलनायक का मतलब रौबदार चेहरा, बड़ी-बड़ी मूछें, दमदार आवाज माना जाता था। जीवन ने इस बात को पूरी तरह से झुठला दिया था। उन्होंने विलेन के किरदार को कॉमेडी के साथ ऐसे जोड़ा कि वह आगे चलकर एक ट्रेंड बन गया। 'अफसाना', 'स्टेशन मास्टर', 'अमर अकबर एंथनी' और 'धर्म-वीर' यादगार फिल्मों में से एक हैं। उन्होंने नागिन, शबनम, हीर-रांझा, जॉनी मेरा नाम, कानून, सुरक्षा, लावारिस, आदि फिल्मों में भी अहम भूमिकाएं निभाई।

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