कहीं जहरीली शराब तो कहीं सैनिटाइजर..., तो क्या सरकार घर-घर बंटवाए शराब ?

31 Jul, 2020 21:08 IST|Sakshi
कॉन्सेप्ट फोटो (सौजन्य गूगल)

आंध्र प्रदेश में सैनिटाइजर पीने से दस लोगों की मौत

पंजाब में जहरीली शराब ने ले ली 21 लोगों की जान

एक तरफ देश और प्रदेश की सरकारों के लिए कोरोना महामारी से उत्पन्न संकट से निपटना एक समस्या बना हुआ है। तो वहीं दूसरी तरफ कोरोना महामारी से इतर, दूसरी समस्याएं और भी मुश्किल पैदा कर रही हैं। शुक्रवार को पंजाब और आंध्र प्रदेश में ऐसे मामले सामने आए, जिसने सोचने को मजबूर कर दिया है कि आखिर देश में हो क्या रहा है। ये दो घटनाएं दो मुख्य समस्याओं की ओर इशारा कर रहीं हैं। लेकिन सरकारों का क्या ? तारीख के साथ ये दोनों घटनाए भी धूमिल हो जाएंगी। लेकिन समस्याएं गंभीर हैं। आइए पहले इन घटनाओं पर एक नजर डालते हैं। 

सैनिटाइजर पीने से दस लोगों की मौत !

आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के कुरिचेडु इलाके में सैनिटाइजर पीकर मरने वाले अनुगोंडु श्रीनू बोया से संबंधित एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस घटना में सैनिटाइजर पीने से दस लोगों की मौत हो गयी। जो जानकारी निकल कर सामने आई है, उसके मुताबिक कोरोना लॉकडाउन के कारण कुरिचेडु में पिछले 10 दिनों से शराब की दुकानें बंद हैं। इससे कुछ स्थानीय लोग और भिखारी शराब के बदले सैनिटाइजर पी गए। इस घटना में दस लोगों ने अपनी जान गंवा दी। अब स्थानीय प्रशासन लोगों से सैनिटाइजर्स नहीं पीने की अपील कर रहा । 

जहरीली शराब ने ली 21 से ज्यादा की जान !

वहीं दूसरी घटना पंजाब में सामने आई है। पंजाब के तीन इलाकों में जहरीली शराब पीने से 21 लोगों की मौत हो गयी है। मरने वाले अलग-अलग जगहों- अमृतसर, बटाला और तरनतारन इलाके से हैं। अर्थात ये साफ हो जाता है कि जहरीली शराब बेचने का धंधा कई इलाकों में फैला हुआ है। घटना सामने आने के बाद अब पुलिस जहरीली शराब बनाने वालो के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। मामले में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। इसकी जांच जालंधर के डिविजनल कमिश्नर को सौंपी गई है। सीएम अमरिंदर ने जांच में दोषी मिले लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। 

हालात हैं चिंताजनक 

इन दोनों ही घटनाओं पर गंभीरता से मंथन करें, तो यो कोई छोटी-मोटी घटनाएं नहीं है। पहली घटना में साफ तौर पर लोगों की अज्ञानता और अशिक्षा उजागर होती है। हैरानी तो इस बात की है कि, क्या इन लोगों को इतनी भी जानकारी नहीं थी (जो कि कॉमन सेंस का मामला है) कि, सैनिटाइजर को कोरोना वायरस मारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो ये जानलेवा साबित हो सकता है। लेकिन शराब की तलब ऐसी कि, बुद्धि ने ही काम करना बंद कर दिया। इन जाहिल-मासूमों ने सैनिटाइजर को ही शराब की तरह पी लिया। गौरतलब है कि यहां शराब की दुकानें बंद थीं और इन्हें पीने के लिए शराब नहीं मिल रही थी। 

दूसरी घटना साफ तौर पर भ्रष्टाचार और प्रशासन की लापरवाही का मामला है। अगर एक साथ तीन जगहों पर लोगों को पीने के लिए जहरीली शराब मिल रही है तो इसमें स्थानीय पुलिस, और आबकारी विभाग की लापरवाही है। कहीं न कहीं मामले को शुरुआती दौर में ही इग्नोर किया गया। जिसके चलते हालात वीभत्स हो गए। 

कोरोना काल में क्या सरकार घर-घर बंटवाए सरकार ?  
ये सवाल हैरान करने वाला है, आप सोच रहे होंगे कि ये कैसा सवाल है ? लेकिन जरा सोचिए, जिस तरह से लोग बुद्धि और विवेक को किनारे रख कर शराब की लत में कुछ भी पीने को तैयार हों, उनके लिए क्या कहा जाए। ऐसे हालातों में तो यही कहा जाएगा न, कि क्या इन जैसे सिरफिरों को घर पर ही शराब उपलब्ध करा दी जाए और कहा जाए कि भाई कोरोना काल में घर पर ही बैठों और मुफ्त की शराब पियो। लेकिन ऐसा कोई भी सरकार नहीं कर सकती। ऐसे में साफ है कि जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की बनती है कि इस कोरोना काल में थोड़ा सा और अलर्ट हो जाए। जहरीली शराब के माफिया पर नियंत्रण करें और लोगों को भी जागरूक करें, जिससे ऐसे हादसों को रोका जा सके।

- विमल श्रीवास्तव, वरिष्ठ सब एडिटर, साक्षी समाचार
 

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