वह बार-बार कहता रहा... सुशांत मर नहीं सकता, फिर... खुद को कमरे में बंद कर फंदे पर झूल गया

17 Jun, 2020 19:25 IST|Sakshi

नौवीं कक्षा के छात्र ने अपने गले में फांसी का फंदा डालकर कर ली आत्महत्या

जिंदगी की परेशानियों और समस्याओं से मुक्ति का यह रास्ता बेहतर

भावुक कर देगा कार्तिक का लिखा सुसाइड नोट

उत्तर प्रदेश के बरेली में 10वीं के एक छात्र कार्तिक ने सोमवार 15 जून को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का उदाहरण देकर फांसी लगाकर जान दे दी। अपने सुसाइड नोट में उसने लिखा कि जब अभिनेता सुशांत सुसाइड कर सकता है तो मैं क्यों नहीं!

कार्तिक के भाई ने बताया कि 14 जून यानि रविवार को पूरे दिन कार्तिक टेलीविजन पर सुशांत सिंह राजपूत की खबरें देखता रहा। फिर, मुझसे यह भी कहा कि चलो, हम दोनों भी सुसाइड कर लेते हैं। पर मैंने सोचा नहीं था कि वह सचमुच ऐसा कर लेगा।

नौवीं कक्षा के छात्र ने अपने गले में फांसी का फंदा डालकर कर ली आत्महत्या

रविवार को सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की खबर ने जहां बॉलीवुड समेत पूरे देश को हिला दिया, वहीं खासकर किशोरों पर इसका ज्यादा असर दिखा। बरेली की इस घटना के ठीक एक दिन बाद बिहारशरीफ से भी ऐसी ही एक घटना सुनने को मिली। बिहार के नालंदा जिले के चंडी थाना क्षेत्र के लोदीपुर गांव का नौवीं कक्षा के छात्र गौतम कुमार ने अपने गले में फांसी का फंदा डालकर आत्महत्या कर ली।

परिजनों ने बताया कि टीवी पर सुशांत सिंह राजपूत की मौत की खबर देखने के ​बाद उसी दिन रात में गौतम ने सुशांत की फिल्म 'एमएस धोनी-अनटोल्ड स्टोरी' देखी और मंगलवार की सुबह अपने निर्माणाधीन मकान के कमरे में दरवाजा बंद कर रस्सी के सहारे फंदे से झूल गया। परिजनों के मुताबिकम सुशांत की मौत की खबर से गौतम सदमे में था। वह बार-बार कह रहा था— सुशांत मर नहीं सकता है।

गौरतलब है कि फिल्मी कलाकारों का क्रेज खासकर छोटे शहरों के किशोरों में ज्यादा देखने को मिलती है। इन कलाकारों को कितने ही लोग अपना आदर्श बना लेते हैं और उनमें से कोई अगर ऐसा कोई गलत कदम उठा ले या उनके साथ ऐसा ही कोई हादसा हो जाए तो ये किशोर भी खुद को खत्म करने की कोशिश करने लगते हैं।

जिंदगी की परेशानियों और समस्याओं से मुक्ति का यह रास्ता बेहतर

इन दोनों मामलों में भी ऐसा ही हुआ। बिहारशरीफ के नौवीें के छात्र गौतम ने तो सिर्फ इसलिए फांसी लगा ली क्योंकि उनके पसंदीदा अभिनेता सुशांत ने भी ऐसा ही किया था। जब​कि उत्तर प्रदेश के बरेली में रहने वाले 10वीं के छात्र ने इसलिए खुदकुशी कर ली क्योंकि सुशांत की मौत से उसे महसूस हुआ कि जिंदगी की परेशानियों और समस्याओं से मुक्ति का यह रास्ता बेहतर है।

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हालांकि, आत्महत्या से पहले गौतम ने अपने पिता के लिए एक भावुक नोट भी छोड़ा, जिसे पढ़कर यह समझा जा सकता है कि कई बार हम किशोरों की मानसिक स्थिति को बेहतर ढंग से न तो समझ पाते हैं और न ही उसे समझने की कोशिश करते हैं जबकि उस वक्त में उसकी गलतफहमियों को दरकिनार कर उसे जिंदगी को बेहतर अंदाज में जीने के लिए प्रेरित करने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। आइए, जानें कि आखिर गौतम ने अपने सुसाइड नोट में ऐसा क्या लिखा था—

भावुक कर देगा कार्तिक का लिखा सुसाइड नोट
पुलिस ने कार्तिक का लिखा एक सुसाइड नोट बरामद किया है, जिसमें उसने लिखा है कि उसकी शक्ल लड़कियों की तरह लगती है। इस कारण क्लास में उसके सभी साथी उसका मजाक बनाते हैं। अब उसे लगने लगा है कि वह किन्नर है। फिर, जब अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत जैसी शख्सियत सुसाइड कर सकता है तो मैं क्यों नहीं!

मेरी मौत के बाद जब इस घर में लड़की जन्म ले तो समझ लेना, वह कार्तिक है। उसने लिखा है कि उसकी मौत के बाद परिवार में अब कोई लड़की जन्म ले तो समझ लेना वह कार्तिक ही है। हालांकि उसने मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। सिर्फ इतना कहा कि अगर उसमें किन्नर जैसे लक्षण हैं तो कभी न कभी वह अपने पिता के लिए ग्रहण बन जाता। इसलिए उसने सुसाइड करने का फैसला लिया।

मुझसे नफरत करने वालों को भी बुलाना
सुसाइड नोट में कहा कि मेरे अंतिम संस्कार में मुझसे नफरत करने वालों को भी बुलाना। उसने अपने ननिहाल पक्ष के लोगों को भी बुलाने के लिए कहा। कार्तिक ने कहा कि अगर वह उसे बेटा समझते हैं तो उसे दफन ना करें। उसका श्मशान में अंतिम संस्कार कर कछला में, जहां मम्मी की अस्थियों को विसर्जित किया था, वहीं पर मेरी भी अस्थियों को विसर्जित किया जाए।

सुशांत की खबर देखकर भाई से बोला था— चलो, दोनों सुसाइड कर लें
रविवार को जब टीवी पर सुशांत सिंह राजपूत की सुसाइड की खबर मीडिया पर आई तो कार्तिक पूरे दिन इस न्यूज़ को ही देखता रहा। इस दौरान उसने अपने छोटे भाई शुभ से कहा था कि जब सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड कर सकता है तो क्यों न हम भी सुसाइड कर लें। हालांकि शुभ ने यह बात अपने पापा को कार्तिक के सुसाइड करने के बाद बताई।

बहरहाल, युवा खासकर किशोरों का बहुत ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि किशोर का मन नदी की तेज बहाव की तरह होता है। वह बगैर सोचे-समझे तेज प्रवाह के साथ किसी भी तरफ मुड़ सकता है। ऐसे में बेहद जरूरी है कि माता-पिता और परिवारजन उनकी मानसिक स्थिति को समझने की कोशिश करते रहें। उनके साथ दोस्ताना व्यवहार रखें। साथ ही, उन्हें सही और गलत काम का अंजाम भी समझाते रहें। उन्हें इस तरह तैयार करें कि जिंदगी का सामना वे डटकर कर सकें, डरकर नहीं। उन्हें अवश्य बताएं कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। जरूरत महसूस हो तो किसी विशेषज्ञ की सलाह के लिए भी उन्हें लेकर जाएं।

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—सुषमाश्री

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