खुद ही बांग्ला नाटको में एक्टिंग करते थे रबीन्द्रनाथ टैगोर, अब भी प्रेरणा देती हैं उनकी ये बातें  

7 Aug, 2020 08:15 IST|Sakshi
रविंद्र नाथ टैगोर

एक महान विचारक और महान कवि थे रविंद्रनाथ टैगोर

गीतांजलि के लिये मिला था टैगोर को नोबेल पुरस्कार

 रबीद्रनाथ टैगोर की आज  79वीं पुण्यतिथि है। नोबेल अवार्ड विनर रबीद्रनाथ का 7 अगस्त 1941 को निधन हुआ था। उनकी रचनाओं पर कई फिल्में, गाने और टीवी शो बन चुके हैं।  खुद रवींद्रनाथ बांग्ला नाटकों में एक्टिंग भी करते थे। उन्होंने 1881 में पहला नाटक टैगोर मेंशन में अपनी भतीजी के साथ प्ले किया था, जिसका टाइटल था 'वाल्मिकी प्रतिभा'। इसके बाद वे 1912 में एक बार फिर बांग्ला नाटक 'पोस्टमैन' में नजर आए थे।

माता पिता की 13वीं संतान थे टैगोर
रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म कोलकाता में 7 मई 1861 हुआ था, ये अपनी माता पिता की 13वीं संतान थे । बचपन में ही इनकी मां शारदा देवी का निधन हो गया था। जिसके बाद इनके पिता देवेंद्र नाथ टैगोर ने ही इनका पालन पोषण किया था । सेंट जेवियर नामक स्कूल से रबीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी शुरूआती  शिक्षा ग्रहण की थी । इनके पिता इन्हे  बैरिस्टर बनाने का सपना पाल के बैठे थे । लेकिन नियति को तो कुछ और ही लिखा था । पिता ने बेटे रबीन्द्रनाथ टैगोर का दाखिला साल 1878 में यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में करवा दिया । लेकिन रबीन्द्रनाथ टैगोर ने कानून की पढ़ाई को बीच में ही छोड़ने का निर्णय लिया । 

साहित्य में बनाना चाहते थे कैरियर
सकी वजह साफ थी रबीन्द्रनाथ टैगोर का मन कानून की पढ़ाई में बिलकुल भी नहीं लग रहा था । बल्कि वो तो साहित्य के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना चाहते थे । सन 1880 आते-आते रबीन्द्रनाथ टैगोर ने कई साहित्यिक रचनाए, कविताएं, कहानियां और उपन्यास लिख डाले और उन्हे प्रकाशित भी करवाया । जिसके बाद वो बंगाल में एक जाना-माना नाम हो गये । सन 1883 में इनकी शादी मृणालिनी देवी से हुआ थ। उनकी पत्नी ने बाद में उच्च शिक्षा प्राप्त की और इंग्लैंड जाकर भी पढ़ाई की। उन्होंने कुछ किताबों का अनुवाद भी किया। टैगोर को उनसे पांच बच्चे हुए। ,लेकिन सन 1902 में उनकी पत्नी की मृत्यु हो गयी ।

दो हजार से ज्यादा गीत लिख चुके हैं टैगोर
रबीन्द्र नाथ टैगोर की रचनाओं की अगर बात की जाए तो इन्होने कई  पुस्तके, निबंध, लघु-कथाएं, नाटक, कविताएं लिखी हैं । अपनी रचनाओं के माध्यम से वो समाज की गलत रीति रिवाजों, कुरीतियों के बारे में लोगों को जागरूक किया करते थे। इनके द्वारा लिखी गयी काबुलीवाला, क्षुदिता पश्न, ‘मुसलमानिर गोल्पो’ ‘हैमांति’ काफी प्रसिद्ध हैं । वही उपन्यासों की अगर बात की जाए तो   ‘गोरा’, ‘नौकादुबी’,‘घारे बायर  ‘चतुरंगा’, और ‘जोगजोग’ काफी प्रसिद्ध हैं । रबीन्द्रनाथ टैगोर की एक खासियत यह भी थी कि उन्हे गीत लिखने का विशेष शौक था, उन्होने कुल दो हजार से ज्यादा गीत अपने जीवन काल में लिखे थे । 

60 की उम्र की चित्रकारी
टै
गोर लेखक होने के साथ साथ चित्रकार भी थे। उन्होंने 60 साल की उम्र के दौरान चित्र बनाने शुरू किए थे। उनकी कई प्रदर्शनी यूरोप, रूस और अमेरिका में लगी हैं। उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, चीन सहित दर्जनों देशों की यात्राएं की थीं। उन्होंने एक दर्जन से अधिक उपन्यास भी लिखे थे। टैगोर ने सेंट जेवियर स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद लंदन में कानून की पढ़ाई की। लेकिन वह बिना डिग्री लिए ही वापस चले आए। वहीं टैगोर के भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर ने 1864 में इंडियन सिविल सर्विस पास की और देश के पहले आईसीएस बने।

अब भी प्रेरणा देती हैं उनकी ये बातें  

1. समय परिवर्तन का धन है, परन्तु घड़ी उसे केवल परिवर्तन के रूप में दिखाती है, धन के रूप में नहीं। ( रविंद्रनाथ टैगोर)
2. विश्वास वह पक्षी है जो प्रभात के अंधकार में ही प्रकाश का अनुभव करता है, और गाने लगता है। (रवींद्रनाथ टैगोर) 
3. यदि आप सभी गलतियों के लिए दरवाजे बंद कर देंगे तो सच बाहर रह जायेगा। (रवींद्रनाथ टैगोर) 
4. मित्रता की गहराई परिचय की लम्बाई पर निर्भर नहीं करती। (रवींद्रनाथ टैगोर) 
5. तितली महीने नहीं क्षण गिनती है और उसके पास पर्याप्त समय होता है। (रवींद्रनाथ टैगोर)

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