तो इसलिए मनाई जाती है नवरात्रि और होती है मां दुर्गा की नौ दिन पूजा, जानें महत्व व कथा

17 Oct, 2020 10:29 IST|मीता
नवरात्रि मां दुर्गा

नवरात्रि में नौ दिन मां दुर्गा की पूजा का महत्व

नौ दिन इसलिए की जाती है मां दुर्गा की पूजा

मां दुर्गा की पूजा का पावन पर्व नवरात्रि अब बस आने ही वाला है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के जयकारे लगते हैं, विशेष पूजा-अर्चना होती है और भक्तजन मां की भक्ति में डूब जाते हैं और उन्हें प्रसन्न करने की हर मुमकिन कोशिश करते हैं। मां दुर्गा की पूजा के साथ ही व्रत भी रखे जाते हैं।

इस बार नवरात्रि का त्योहार 7 अक्टूबर से आरंभ होकर 25 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। इस बार पूरे एक महीने विलंब से आई है नवरात्रि क्योंकि एक माह का अधिक मास था।

हममें से अधिकतर लोग ये तो जानते हैं कि नवरात्रि चार होती है दो गुप्त और दो सामान्यजन के लिए। एक चैत्र नवरात्रि और दूसरी शारदीय नवरात्रि। पर बहुतों को ये नहीं पता होता कि आखिर नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? और इन नौ दिनों में माता दुर्गा की पूजा का क्या महत्व है? 

वैसे देखा जाए तो मां दुर्गा की पूजा के लिए किसी खास समय की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन नवरात्रि का समय मां की पूजा के लिए विशेष माना गया है। नवरात्रि मनाने के पीछे का प्राकृतिक कारण तो यह माना जाता है कि इस समय मौसम परिवर्तित होता है। इसलिए जब हम नौ दिनों तक व्रत करते हैं तो शरीर को ऋतु के अनुसार ढलने का समय मिल जाता है। जो हमारे स्वास्थ के लिए अच्छा माना जाता है। 

जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक महत्व

नवरात्रि मनाने के विषय में दो कथाएं मिलती हैं। एक कथा रामनवमी से संबंधित है तो दूसरी कथा महिषासुर के वध से संबंधित है। 

प्रथम कथा के अनुसार महिषासुर नाम का राक्षस था जो ब्रह्मा जी का उपासक था। अपने तप के बल पर उसने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि कोई मनुष्य, देवता या दानव उसका अंत न कर सके। अपने इस वरदान के कारण वह निर्दयता से तीनों लोकों में आतंक मचाने लगा। देवता और ऋषि-मुनि सभी उसके कृत्यों से अत्यन्त परेशान हो गए। तब सृष्टि के रचियता ब्रह्मा, पालनकर्ता विष्णु और देवों के देव महादेव ने अपनी शक्तियों को एक साथ करके मां दुर्गा को उत्पन्न किया। 

मां दुर्गा और महिषासुर के बीच पूरे नौ दिनों तक युद्ध चला। जिसके पश्चात् मां दुर्गा ने उस राक्षस का अंत कर दिया और सभी को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई।

दूसरी कथा के अनुसार राम जी लंका पर आक्रमण करने से पहले रावण से युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते थे। तब उन्होंने रामेश्वरम में नौ दिनों तक मां की पूजा आराधना की। जिसके  बाद राम जी ने लंका पर विजय प्राप्त की। इसलिए नवरात्रि के बाद दशहरा (विजयदशमी) का त्योहार अच्छाई की बुराई पर जीत के रुप में मनाया जाता है।

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