तुला संक्रांति पर ऐसे करेंगे सूर्य पूजा तो यश, कीर्ति के साथ मिलेगा आरोग्य का वरदान

17 Oct, 2020 08:11 IST|मीता
सूर्य देव

तुला संक्रांति का महत्व 

ऐसे करें सूर्य पूजा मिलेगा शुभ फल

हर महीने सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं और इसीको संक्रांति कहते हैं। वे जिस राशि में प्रवेश करते हैं उसी नाम से संक्रांति जानी जाती है। 

अश्विन महीने तुला संक्रांति पर्व मनाया जाता है। जिस दिन सूर्य कन्या राशि से तुला राशि में प्रवेश करता है उस दिन को तुला संक्रांति पर्व कहा जाता है। इस दिन सूर्य दक्षिण गोल में चला जाता है। सूर्य के बदलाव के कुछ ही दिनों बाद शरद ऋतु खत्म हो जाती है और हेमंत ऋतु शुरू हो जाती है। 

तुला संक्रांति पर्व 17 अक्टूबर शनिवार को मनाया जा रहा है। इस दिन से 16 नवंबर तक सूर्य तुला राशि में रहेगा।

तुला संक्रांति का महत्व 

तुला संक्रांति पर तीर्थ स्नान, दान और सूर्य पूजा करने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। इससे उम्र बढ़ती है। सूर्य पूजा से सकारात्मकता ऊर्जा मिलती है और इच्छा शक्ति भी बढ़ती है। तुला संक्रांति का कर्नाटक और उड़ीसा में खास महत्व है। इसे तुला संक्रमण भी कहा जाता है। इस दिन कावेरी के तट पर मेला लगता है, जहां स्नान और दान-पुण्‍य किया जाता है।


तुला संक्रांति पर बन रहा शुभ संयोग

इस बार ऐसा संयोग बना है जब तुला संक्रांति पर ही नवरात्र की शुरुआत हो रही है। आमतौर ये संक्रांति नवरात्र से पहले या नवरात्र के दौरान पड़ती है। इन दो पर्वों का संयोग देश के शुभ रहेगा। इससे सुख और समृद्धि बढ़ेगी। सूर्य और शक्ति के प्रभाव से महामारी का असर भी कम होने की संभावना है। इन दोनों पर्व को पूरे भारत में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। राशि परिवर्तन के समय सूर्य की पूजा की जाती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की जाती है।

चढ़ाए जाते हैं ताजे धान

तुला संक्रांति और सूर्य के तुला राशि में रहने वाले पूरे 1 महीने तक पवित्र जलाशयों में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है।
तुला संक्रांति का वक्त जो होता है उस दौरान धान के पौधों में दाने आना शुरू हो जाते हैं। इसी खुशी में मां लक्ष्मी का आभार जताने के लिए ताजे धान चढ़ाएं जाते हैं।

कई इलाकों में गेहूं और कारा पौधे की टहनियां भी चढ़ाई जाती हैं। मां लक्ष्मी से प्रार्थना की जाती है कि वो उनकी फसल को सूखा, बाढ़, कीट और बीमारियों से बचाकर रखें और हर साल उन्हें लहलहाती हुई ज्यादा फसल दें।

इस दिन देवी लक्ष्मी की विशेष पूजन का भी विधान है। माना जाता है इस दिन देवी लक्ष्मी का परिवार सहित पूजन करने और उन्हें चावल अर्पित करने से भविष्य में कभी भी अन्न की कमी नहीं आती।
 

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