रविवार को यूं करेंगे सूर्य पूजा तो मिलेगा सुख-समृद्धि का वरदान

17 May, 2020 03:30 IST|Sakshi
सूर्य पूजा का महत्व

रविवार को सूर्य पूजा का महत्व

ऐसे करें सूर्य पूजा और पाएं सफलता

रविवार को सूर्य पूजा का विशेष महत्व है। वैसे तो रोजाना ही ज्यादातर लोग स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं लेकिन रविवार सूर्य देवता का दिन होता है। नारद पुराण में लिखा गया है कि रविवार को उपवास रखकर सूर्यदेवता की विधि विधान से पूजा करने से व्यक्ति आजीवन निरोगी और स्वस्थ रहता है। सूर्य देवता को नव ग्रहों का राजा माना जाता है और सूर्य की उपासना करने से व्यक्ति के सभी ग्रह शांत हो जाते हैं। 

अगर आपके मन में भी कई सारी इच्छाएं और मनोकामनाएं हैं तो आप रविवार का व्रत कर सकते हैं। सूर्यदेव का व्रत सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह व्रत सुख और शांति देता है।

ऐसे दें सूर्य को अर्घ्य

पौराणिक धार्मिक ग्रंथों में भगवान सूर्य के अर्घ्यदान का विशेष महत्व बताया गया है। प्रतिदिन प्रात:काल में तांबे के लोटे में जल लेकर और उसमें लाल फूल, चावल डालकर प्रसन्न मन से सूर्य मंत्र का जाप करते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। इस अर्घ्यदान से भगवान सूर्य प्रसन्न होकर आयु, आरोग्य, धन, धान्य, पुत्र, मित्र, तेज, यश, विद्या, वैभव और सौभाग्य को प्रदान करते हैं।

कब शुरू करें रविवार का व्रत 

- आमतौर पर रविवार का व्रत आप वर्ष के किसी भी माह से प्रारंभ कर सकते हैं लेकिन इतना ध्यान रखें कि किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से ही अपना व्रत शुरू करें।
- रविवार का व्रत शुरू करने के बाद कम से कम एक वर्ष या पांच वर्ष बाद ही इसका समापन करना चाहिए।
- रविवार का व्रत प्रारंभ करने से पहले सूर्य की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे गुलाल, लाल चंदन, कंडेल का फूल, लाल वस्त्र और गुड़ इकट्ठा कर लें।
- रविवार का व्रत रखें तो सूरज डूबने से पहले की सूर्य देव की पूजा कर लें और किसी एक ही पहर में भोजन करें।

यूं करें रविवार को सूर्यदेव की पूजा 

- तड़के सुबह उठकर नित्यक्रिया के बाद स्नान करें और लाल वस्त्र धारण करके अपने माथे पर लाल चंदन का तिलक लगाएं।
- इसके बाद तांबे के कलश में जल भरें और उसमें लाल फूल, रोली और अक्षत डालकर ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं।
- शाम को सूर्यास्त से पहले गुड़ का हलवा बनाकर सूर्य देवता को चढ़ाएं और इसे प्रसाद के रूप में बांटें।
- अगर संभव हो तो सूर्य देव की पूजा करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दें।

सूर्य पूजा में करें इन नियमों का पालन

- प्रतिदिन सूर्योदय से पहले ही शुद्ध होकर और स्नान से कर लेना चाहिए।

- नहाने के बाद सूर्यनारायण को तीन बार अर्घ्य देकर प्रणाम करें।

- संध्या के समय फिर से सूर्य को अर्घ्य देकर प्रणाम करें।

- सूर्य के मंत्रों का जाप श्रद्धापूर्वक करें।

- आदित्य हृदय का नियमित पाठ करें।

- स्वास्थ्य लाभ की कामना, नेत्र रोग से बचने एवं अंधेपन से रक्षा के लिए 'नेत्रोपनिषद्' का प्रतिदिन पाठ करना चाहिए।

- रविवार को तेल, नमक नहीं खाना चाहिए तथा एक समय ही भोजन करना चाहिए।

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