जानें क्यों और कैसे सर्वपितृ अमावस्या बनी पितरों के लिए महत्वपूर्ण , मुहूर्त व कथा

11 Sep, 2020 18:58 IST|मीता
सर्वपितृ अमावस्या

सर्वपितृ अमावस्या का महत्व

पितरों के लिए महत्वपूर्ण है ये तिथि

हिंदू धर्म में अमावस्या व पूर्णिमा तिथि का बड़ा महत्व है। हर अमावस्या पर यूं तो स्नान-दान का महत्व होता ही है पर पितृपक्ष की अमावस्या का तो विशेष महत्व होता है। इसे सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं। 

माना जाता है कि अमावस्या तिथि मनुष्य की जन्मकुंडली में बने हुए पितृदोष-मातृदोष से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ तर्पण, पिंडदान एवं श्राद्ध के लिए अक्षय फलदायी मानी गई है। शास्त्रों में इस तिथि को 'सर्वपितृ श्राद्ध' तिथि भी माना गया है। इसके पीछे एक महत्वपूर्ण घटना है। 

देवताओं के पितृगण 'अग्निष्वात्त' जो सोमपथ लोक मे निवास करते हैं। उनकी मानसी कन्या, 'अच्छोदा' नाम की एक नदी के रूप में अवस्थित हुई। एक बार अच्छोदा ने एक हज़ार वर्ष तक निर्बाध तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर दिव्यशक्ति परायण देवताओं के पितृगण 'अग्निष्वात्त' अच्छोदा को वरदान देने के लिए दिव्य सुदर्शन शरीर धारण कर आश्विन अमावस्या के दिन उपस्थित हुए।

उन पितृगणों में 'अमावसु' नाम की एक अत्यंत सुंदर पितर की मनोहारी-छवि यौवन और तेज देखकर अच्छोदा कामातुर हो गयी और उनसे प्रणय निवेदन करने लगीं किन्तु अमावसु अच्छोदा की कामप्रार्थना को ठुकराकर अनिच्छा प्रकट की, इससे अच्छोदा अति लज्जित हुई और स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरी।

अमावसु के ब्रह्मचर्य और धैर्य की सभी पितरों ने सराहना की एवं वरदान दिया कि यह अमावस्या की तिथि 'अमावसु' के नाम से जानी जाएगी। जो प्राणी किसी भी दिन श्राद्ध न कर पाए वह केवल अमावस्या के दिन श्राद्ध-तर्पण करके सभी बीते चौदह दिनों का पुण्य प्राप्त करते हुए अपने पितरों को तृप्त कर सकते हैं। तभी से प्रत्येक माह की अमावस्या तिथि को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है और यह तिथि 'सर्वपितृ श्राद्ध' के रूप में भी मनाई जाती है। 

सर्व पितृ अमावस्या 2020 तिथि मुहूर्त 


अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 16 सितंबर को शाम 07:56

अमावस्या तिथि समाप्त: 17 सितंबर को शाम 04:29

कुतुप मूहूर्त: सुबह 11:51 से 12:40 तक

रौहिण मूहूर्त: दोपहर 12:40 से 1:29 तक

अपराह्न काल: दोपहर 1:29 से 3:56 तक

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