नवरात्रि स्पेशल: यहां विराजित हैं 16 भुजाओं वाली मां दुर्गा, क्रिकेट जगत के दिग्गज भी नवाते हैं शीश

21 Oct, 2020 19:50 IST|सुषमाश्री
देवड़ी मंदिर, रांची, झारखंड

मंदिर की विराट स्थापत्य कला

ऐतिहासिक है माता का मंदिर

मंदिर को लेकर कई मान्यताएं

नई दिल्ली : प्राचीन सभ्यताओं को न केवल सहेजने बल्कि अपने अंदर समेटने वाला देश है हमारा भारत। देश के अलग अलग राज्यों में स्थित मंदिर हमारी सभ्यता, संस्कृति और कला कौशल के परिचायक हैं।

हर मंदिर की अपनी अलग विशेषता है। आइए, आज जानते हैं भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के शहर रांची के एक ऐसे मंदिर के बारे में, जिसे खुद धोनी की आस्था ने बेहद विख्यात बना दिया।

ऐतिहासिक है माता का मंदिर

मान्यता है कि रांची स्थित देवड़ी मंदिर का निर्माण 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच हुआ था। हालांकि, इस मंदिर के निर्माण को लेकर किसी भी तरह के साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। यहां के पुराने लोगों या पुजारियों में से भी किसी ने अब तक यह नहीं माना है कि उन्होंने इस मंदिर को बनते देखा है।

मंदिर को लेकर कई मान्यताएं

यहां के पुजारी के मुताबिक एक भक्त को इस मंदिर की उपस्थिति के बारे में स्वप्न आया था। उस भक्त ने फिर जंगल के अंदर जाकर इस मंदिर की खोज शुरू कर दी। उसके बाद ही जंगल की झाड़ियों के बीच देवड़ी माता का यह मंदिर मिला।

देवड़ी माता के इस मंदिर के निर्माण के बारे में एक कथा यह भी है कि सिंहभूम के मुंडा राजा केरा ने युद्ध में परास्त होकर लौटते समय इसकी स्थापना की थी। कहते हैं कि देवी ने सपने में आकर राजा को मंदिर स्थापना करने का आदेश दिया था, जिसके बाद राजा केरा को उनका राज्य दोबारा प्राप्त हो गया था।

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मंदिर की विराट स्थापत्य कला

इस मंदिर के दरवाजे भी पत्थर के बने हुए हैं। मंदिर में करीब तीन से साढ़े तीन फीट ऊंची देवड़ी वाली मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित है। आपने मंदिरों में 8 या 10 भुजाओं वाली दुर्गा माता देखी होंगी लेकिन इस मंदिर में विराजित हैं 16 भुजाओं वाली मां दुर्गा। देवड़ी माता सिंहवाहिनी मां दुर्गा का ही स्वरूप हैं।

धोनी की आस्था और विश्वास

मंदिर में खेल जगत के सितारों से लेकर राजनेता और विदेशी श्रद्धालु भी भक्ति भाव से भेंट लेकर आते हैं। जो भी भक्त मां के चरणों में शीश झुकाता है, उसकी मनोकामना अधूरी नहीं रहती। महेंद्र सिंह धोनी अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत से ही माता के दर्शन के लिए आते रहे हैं। इस मंदिर में उनकी अटूट आस्था है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने जाने से पहले धोनी यहां दर्शन करने जरूर आते थे।

जिन श्रद्धालुओं की मन्नत यहां पूरी होती है, वे अपनी श्रद्धा के हिसाब से चढ़ावा भी चढ़ाते हैं। यही नहीं, मां के दरबार में बार-बार आते हैं।

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