आखिर क्या है ॐ का रहस्य ? क्या सच में ऊं के जाप से नहीं मिलता मोक्ष? जानें क्या है सच

16 Sep, 2020 11:13 IST|मीता
ऊं का रहस्य

ऊं का रहस्य 

ऊं से जुड़ी खास बातें 

हम हर मंत्र के साथ ऊं को जोड़कर जाप करते आ रहे हैं और मानते आ रहे हैं  कि ऊं सभी मंत्रों का राजा है । सभी बीजमंत्र तथा मंत्र इसीसे उत्पन्न हुए हैं । इसे कुछ मंत्रों के पहले लगाया जाता है । यह परब्रह्म का परिचायक है ।

ॐ का रहस्य- निरंतर जप का प्रभाव

यह भी माना जाता है कि  ॐ र्इश्वर के निर्गुण तत्त्व से संबंधित है । र्इश्वर के निर्गुण तत्त्व से ही पूरे सगुण ब्रह्मांड की निर्मित हुई है । इस कारण जब कोई ॐ का जप करता है, तब अत्यधिक शक्ति निर्मित होती है । यह ॐ का रहस्य है।

यदि व्यक्ति का आध्यात्मिक स्तर कनिष्ठ हो, तो केवल ॐ का जप करने से दुष्प्रभाव हो सकता है; क्योंकि उसमें इस जप से निर्मित आध्यात्मिक शक्ति को सहन करने की क्षमता नहीं होती ।

भगवान के नाम के आगे ॐ लगानेवालों के लिए जैसे ॐ नमः शिवाय का जप करनेवालों पर यह लागू नहीं होता । एक सामान्य व्यक्ति (पुरुष अथवा स्त्री) ॐ नमः शिवाय का मंत्र जप, ॐ से बिना प्रभावित हुए कर सकता है ।

- नियमित ॐ का जप करनेवाले कनिष्ठ आध्यात्मिक स्तर के व्यक्ति पर, ॐ से निर्मित आध्यात्मिक शक्ति का विपरीत प्रभाव हो सकता है । कनिष्ठ आध्यात्मिक स्तर के व्यक्ति को शारीरिक कष्ट जैसे अति अम्लता, शरीर के तापमान में वृद्धि इत्यादि अथवा मानसिक स्तर पर व्याकुलता हो सकती है ।
 स्त्रियों के लिए हम विशेष रूप से सुझाना चाहेंगे कि उन्हें केवल ॐ का जप नहीं करना चाहिए । ॐ से उत्सर्जित तरंगों से अत्यधिक शक्ति उत्पन्न होती है, जिससे भौतिक एवं सूक्ष्म उष्णता निर्मित होती है । इससे पुरुषों की जननेन्द्रियों पर कोई प्रभाव नहीं पडता, क्योंकि वे देह रिक्ति से बाहर होती हैं; परंतु स्त्रियों के प्रसंग में, ये उष्णता उनके जननांगों को प्रभावित कर सकती है क्योंकि स्त्रियों की जननेन्द्रियां पेट की रिक्ति के भीतर होती हैं । इसलिए उन्हें अत्यधिक मासिक स्राव, मासिक स्राव न होना , मासिक स्राव के समय अत्यधिक वेदना होना, गर्भधारण न होना इत्यादि कष्ट हो सकते हैं । इसलिए जबतक कि गुरु अथवा संत  विशेष रूप से करने के लिए नहीं कहते, स्त्रियों को केवल ॐ का जप नहीं करना चाहिए।

ॐ का रहस्य है- विभिन्न स्थानों पर ॐ छापना

अध्यात्मशास्त्र का आधारभूत नियम कहता है कि, शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध तथा उससे संबंधित शक्ति एकसाथ होती है । इसका अर्थ है कि जहां पर भी र्इश्वर का सांकेतिक रूप उपस्थित होता है, वहां उनकी शक्ति भी रहेगी । टी-शर्ट अथवा टेटू पर ॐ का चिन्ह होने से निम्नलिखित कष्टदायक अनुभव हो सकते हैं :

कष्ट जैसे, अतिअम्लता, शारीरिक तापमान में वृद्धि आदि ।
कष्ट जैसे व्याकुलता ।
ॐ का महत्वपूर्ण रहस्य यह है कि ॐ के चिन्ह का कहीं भी चित्रण करना, र्इश्वर से संबंधित सांकेतिक चिन्हों के साथ खिलवाड करना है और इससे पाप लगता है ।

पर अब ऊं के रहस्य पर बहस छिड़ गई जब संत रामपालजी महाराज ने कुछ संतों पर सवाल उठाया जब उन्होंने ऊं को काल का मंत्र बताया। संत रामपाल जी के ट्वीट पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रीट्वीट किया है ...

#ॐ_का_रहस्य
"Om Mantra can't grant Moksha"
~ Shrimad Bhagvad Geeta chapter 8 verse 16.

Supreme god Kabir Saheb@SaintRampalJiM pic.twitter.com/OjGPyoTqae

— Mayank das Barwani Ashram (@sirmayankrathod) September 16, 2020
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