कर्क संक्रांति 2020: सूर्यदेव होंगे दक्षिणायन, देवों की रात और पितरों के दिन की होगी शुरुआत

16 Jul, 2020 04:50 IST|Sakshi
सूर्य का दक्षिणायन

16 जुलाई को है कर्क संक्रांति 

कर्क संक्रांति पर सूर्यदेव होंगे दक्षिणायन 

कर्क संक्रांति यानी सूर्यदेव मिथुन राशि को छोड़कर कर्क में करेंगे प्रवेश। मकर संक्रांति की ही तरह कर्क संक्रांति का भी विशेष महत्व होता है क्योंकि जहां मकर संक्रांति को उत्तरायण की शुरुआत होती है तो वहीं कर्क संक्रांति से शुरू होता है दक्षिणायन। 

इस बार कर्क संक्रांति 16 जुलाई, गुरुवार को है तो इसी दिन शुरू होगा दक्षिणायन जो अगले 6 महीनों तक चलेगा। इसी के साथ कर्क राशि से लेकर 6 राशियों कर्क, सिंह, कन्या, तुला वृश्चिक और धनु राशि की सूर्य की यात्रा की अवधि के मध्य पितरों का दिन और देवताओं की रात्रि आरम्भ हो जायेगी।


तो ये है अयन का अर्थ  

सूर्य का उत्तरायण और दक्षिणायन होता है तो सवाल उठता है कि आखिर अयन क्या है और क्या है इसका अर्थ। तो यहां जानें कि अयन का अर्थ होता है परिवर्तन। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक वर्ष में दो अयन होते हैं। साल में दो बार सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है। सूर्य 6 महीने उत्तरायण और 6 महीने दक्षिणायन में रहता है। 

तो आइए अब जानते हैं सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन के बारे में ....

ज्योतिष में उत्तरायण और दक्षिणायन 


हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य मकर से मिथुन राशि तक भ्रमण करता है, तो इस अंतराल को उत्तरायण कहते हैं। सूर्य के उत्तरायण की यह अवधि 6 माह की होती है। वहीं जब सूर्य कर्क राशि से धनु राशि तक भ्रमण करता है तब इस समय को दक्षिणायन कहते हैं। 

दक्षिणायन को नकारात्मकता का और उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। सौरमास का आरम्भ सूर्य संक्रांति से होता है। सूर्य की एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति को सौरमास कहते हैं।

ये है उत्तरायण का महत्व
 

उत्तरायण को देवी- देवताओं का दिन माना गया है। उत्तरायण के 6 महीनों के दौरान नए कार्य जैसे- गृह प्रवेश, यज्ञ, व्रत, अनुष्ठान, विवाह, मुंडन आदि जैसे कार्य करना शुभ माना जाता है। उत्तरायण के समय दिन लंबा और रात छोटी होती है। इसमें तीर्थयात्रा, धामों के दर्शन और उत्सवों का समय होता है। उत्तरायण के दौरान तीन ऋतुएं होती है- शिशिर, बसन्त और ग्रीष्म

ये है दक्षिणायन का महत्व


मान्यताओं के अनुसार दक्षिणायन का काल देवताओं की रात्रि मानी गई है। दक्षिणायन के समय में रातें लंबी हो जाती हैं और दिन छोटे होने लगते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दक्षिणायन होने पर सूर्य दक्षिण की ओर झुकाव के साथ गति करता है। दक्षिणायन में विवाह, मुंडन, उपनयन आदि विशेष शुभ कार्य निषेध माने जाते हैं। दक्षिणायन के दौरान वर्षा, शरद और हेमंत, ये तीन ऋतुएं होती हैं। तामसिक प्रयोगों के लिए दक्षिणायन का समय उपयुक्त होता है।

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