दशहरा 2020: मंदोदरी को मानते हैं बेटी, इसलिए मध्य प्रदेश के मंदसौर में लोग करते हैं रावण की पूजा

25 Oct, 2020 09:19 IST|सुषमाश्री
रावण को दामाद मानते हैं यहां के लोग

नई दिल्ली: दशहरा यानी बुराई पर अच्छाई की जीत। समूचे देश में रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है जबकि राम को अच्छाई का। आज 25 अक्टूबर को रविवार के दिन पूरा देश दशहरा का त्यौहार मना रहा है। जगह जगह राम की पूजा की जाएगी और रावण का दहन। वहीं, कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां बुराई का प्रतीक माने जाने वाले रावण की पूजा की जाती है। ऐसा ही एक खास स्थान है मध्य प्रदेश का मंदसौर शहर।

मंदसौर से रावण का एक खास रिश्ता भी बताया जाता है। प्राचीनकाल में मंदसौर को दशपुर कहा जाता था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मंदसौर रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था। यही वजह है कि यहां के लोग रावण को अपना दामाद मानते हैं। दशहरा के दिन हर जगह रावण का पुतला जलाते हैं लेकिन मंदसौर में साल भर रावण की पूजा की जाती है।

मंदसौर में नामदेव समाज के लोग मंदोदरी को अपने वंश की बेटी बताते हैं। इस वजह से ही रावण को वहां आज भी जमाई जैसा सम्मान दिया जाता है। मंदसौर में रावण की एक विशाल प्रतिमा भी है, जहां हर दिन लोग उसकी पूजा करने आते हैं। 41 फीट ऊंची और विशाल रावण की ये प्रतिमा लगभग चार सौ साल पुरानी मानी जाती है।

यहां औरतें रावण को दामाद मानती हैं इसलिए उसकी पूजा करने के दौरान घूंघट करती हैं। विशेष रूप से संतान प्राप्ति के लिए यहां रावण की पूजा की जाती है। यहां के लोग दशहरा के दिन सुबह-सुबह ढोल-बाजे के साथ जाकर रावण की प्रतिमा की पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद राम और रावण की सेनाएं निकलती हैं और शाम के समय रावण दहन किया जाता है। दहन से पहले लोग रावण से क्षमा याचना करना नहीं भूलते।

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