इंदिरा एकादशी पर यूं करें श्री हरि को प्रसन्न, भूलकर भी न करें यो गलतियां

12 Sep, 2020 21:55 IST|मीता
इंदिरा एकादशी की पूजा

इंदिरा एकादशी का महत्व

इंदिरा एकादशी के नियम

जानें इंदिरा एकादशी पर क्या करें और क्या न करें 

हिंदू धर्म में एकादशी के व्रत का बड़ा महत्व है। माना जाता है कि एकादशी तिथि भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है। वैसे तो हर एकादशी महत्वपूर्ण होती है पर पितृपक्ष की एकादशी तो पितरों के तर्पण के लिए खास महत्व रखती है। पितरों की शांति के लिए यह व्रत रखा जाता है। 

हिन्दू पंचांग के अनुसार यह व्रत प्रति वर्ष आश्विन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन रखा जाता है। इस साल इंदिरा एकादशी का व्रत 13 सितंबर रविवार को रखा जाएगा। 

तो आइए जानते हैं इस व्रत के नियम। इस व्रत के दौरान आखिर क्या करना चाहिए और क्या नहीं .....

- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के पावन दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चावल का सेवन करने से मनुष्य का जन्म रेंगने वाले जीव की योनि में होता है। इस दिन जो लोग व्रत नहीं रखते हैं, उन्हें भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।

- एकादशी का पावन दिन भगवान विष्णु की अराधना का होता है, इस दिन सिर्फ भगवान का गुणगान करना चाहिए। एकादशी के दिन गुस्सा नहीं करना चाहिए और वाद-विवाद से दूर रहना चाहिए।

- एकादशी के दिन शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए, इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। 

- एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।

- एकादशी के दिन महिलाओं का अपमान करने से व्रत का फल नहीं मिलता है। सिर्फ एकादशी के दिन ही नहीं व्यक्ति को किसी भी दिन महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति महिलाओं का सम्मान नहीं करते हैं उन्हें जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

- एकादशी के पावन दिन मांस-मंदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन ऐसा करने से जीवन में तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
- इस दिन व्रत करना चाहिए। अगर आप व्रत नहीं करते हैं तो एकादशी के दिन सात्विक भोजन का ही सेवन करें।

- एकादशी के दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि आप किसी कारण से व्रत नहीं कर सकते है तो इस दिन मन में विष्णु भगवान का ध्यान करते हुए सात्विक रहें। झूठ न बोलें, किसी का मन नहीं दुखाएं एवं पर निंदा से बचें।


 

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