कर्क संक्रांति 2020: इस दिन नहीं किया जाता कोई शुभ काम, इन चीजों का करें दान

16 Jul, 2020 03:20 IST|Sakshi
सूर्यदेव का दक्षिणायन

कर्क संक्रांति पर है दान-पुण्य का महत्व

इस दिन नहीं किए जाते शुभ कार्य 

गुरुवार, 16 जुलाई को सूर्यदेव मिथुन को छोड़कर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्यदेव के कर्क राशि में जाते ही दक्षिणायन की शुरुआत हो जाती है। कर्क संक्रांति को छह माह के उत्तरायण काल का अंत माना जाता है।

माना जाता है इस दिन से छह माह तक देवताओं की रात्रि आरंभ हो जाती है। मकर संक्रांति से अग्नि तत्व बढ़ता है, जबकि कर्क संक्रांति से जल तत्व की अधिकता हो जाती है।

शास्त्र कहते हैं कि इस दिन किए गए कार्य पर देवों का आशीर्वाद नहीं मिलता है, इसलिए कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है। कर्क संक्रांति से ही छह महीने तक सूर्य के उत्तरायण काल का अंत होता है यानी सूर्य इस दिन से दक्षिणायन हो जाता है, जो मकर संक्रांति तक चलता है। कर्क संक्रांति के दिन पितृ दर्पण, दान, धार्मिक कार्य और स्नान आदि का बहुत महत्व होता है।

16 जुलाई को सुबह 10 बजकर 32 मिनट पर सूर्य कर्क राशि में गोचर करेगा। कर्क राशि में सूर्य 16 अगस्त शाम को 6 बजकर 56 मिनट तक इसी राशि में रहेगा।


कर्क संक्रांति में क्यों नहीं होते शुभ कार्य 

- माना जाता है कि मकर संक्रांति से अग्नि तत्व बढ़ता है, इससे सकारात्मकता और शुभ ऊर्जा का संचार होता है। जबकि कर्क संक्रांति के दिन से सब कुछ उलट हो जाता है। कर्क संक्रांति से जल तत्व की अधिकता होने लगती है और इस कारण नकारात्मकता हावी होने लगती है। इसलिए इस दौरान किया गया कार्य शुभ फल नहीं देता है। 

-सूर्य के दक्षिणायन होने से नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होती हैं जबकि जब सूर्य उत्तरायण होता है तो इससे शुभता का प्रसार होता है। यही कारण है कि कर्क संक्रांति पर कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। 

-इस दिन से सूर्य के साथ अन्य देवतागण भी निद्रा में चले जाते हैं। जब तक देवशयनी एकादशी नहीं आती और भगवान विष्णु नहीं जागते तब तक भोलेनाथ सृष्टि को संभालते हैं। इसी वजह से सावन के महीने में शिव पूजन का महत्व और बढ़ जाता है।

कर्क संक्रांति पर करें ये काम 

- इस दिन सूर्यदेव को जल अर्पित करें। संक्रांति में की गई सूर्य उपासना से दोषों का शमन होता है। सूर्यदेव से सदा स्वस्थ रहने से कामना करें।
- कर्क राशि में सूर्य के प्रवेश पर “ऊं घृ‍णिं सूर्य: आदित्य:” मंत्र का  जाप कम से कम 108 बार जरूर करना चाहिए।
- कर्क संक्रांति के दिन गरीबों को अन्न, धन्न और वस्त्र आदि का दान जरूर करना चाहिए।
-इस समय में शहद का प्रयोग लाभकारी माना जाता है।
-कर्क संक्रांति पर वस्त्र एवं खाने की चीजों और विशेषकर तेल के दान का विशेष महत्व है।
- कर्क संक्रांति के दिन पीपल या बरगद का पेड़ लगाने को बहुत पुण्य मिलता है।
- यदि आपका सूर्य नीच है तो आपको इस दिन तांबे का कड़ा या छल्ला पहनना चाहिए है।
- सूर्यास्त से पहले दिन में कभी भी “ऊं आदित्याय नम: “मंत्र का जाप यथा संभवन जितना हो सके करें।

अवश्य करें इन पांच चीजों का दान 

-सुहागन बुजुर्ग महिला को वस्त्र

-किसी बुजुर्ग को पूजा में पहनने वाला धोती वस्त्र

-किसी बालिका को नारंगी रंग का परिधान

-किसी बालक को हरे फल

-किसी नवविवाहित दम्पति को भोजन कराएं।

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