रविवार को पद्मिनी एकादशी पर यूं विष्णु के साथ सूर्य पूजा करें और शुभ फल पाएं

26 Sep, 2020 22:08 IST|मीता
विष्णु और सूर्य

अधिक मास की पद्मिनी एकादशी का महत्व

रविवार को है पद्मिनी एकादशी 

विष्णु पूजा के साथ करें सूर्य को प्रसन्न

हम सब जानते ही हैं कि अधिक मास चल रहा है और अधिक मास में विशेष रूप से भगवान श्री विष्णु की पूजा की जाती है और यह श्रीहरि विष्णु का प्रिय मास है।

ऐसा कहा जाता हैं कि अधिक मास व्रत करने वाला तथा खास तौर पर एकादशी का व्रत करने से जीवन के हर प्रकार के दु:खों से छूट जाता है और अंत में व्रतधारियों को वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

अधिक मास की शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी रविवार 27 सितंबर को पड़ रही है इसलिए इसका महत्व अधिक बढ़ गया है। पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास में पड़ने वाली इस एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी का अधिक महत्व है। 

यह एकादशी 27 सितंबर को प्रात: 06:02 मिनट से प्रारंभ और 28 सितंबर को प्रात: 07.50 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त होगी।

पौराणिक शास्त्रों के अनुसर जिस तरह अधिक मास 3 साल में एक बार आता है, उसी प्रकार यह एकादशी भी 3 साल में एक बार आती है इसीलिए इसका महत्व बढ़ जाता है। 

इस बार पद्मिनी एकादशी रविवार को है तो भगवान विष्णु के साथ सूर्यदेव की पूजा करें ताकि आपको कष्टों से मुक्ति मिल सके साथ ही सुखों की प्राप्ति भी हो सके। 

आइये यहां जानते हैं पद्मिनी एकादशी पर क्या कुछ खास करना चाहिए-

- इस दिन सुबह उठकर सच्चे मन से व्रत का संकल्प लेकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद भगवान श्रीविष्णु जी की धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प एवं मौसमी फलों से पूजा करना चाहिए।

- पद्मिनी एकादशी के दिन भगवान श्रीविष्णु के साथ ही सूर्य देवता की भी पूजा अवश्य करनी चाहिए।

- भगवान श्रीविष्णु को पंचामृत से स्नान अवश्य कराएं।

- इस दिन आप फलाहार का सेवन कर सकते हैं।

- अधिक मास में इस एकादशी व्रत का महत्व तो स्वयं श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर और अर्जुन को बताया था। अत: इस दिन भगवान विष्णु और सूर्य देवता का पूजन साथ-साथ करने से जीवन की अनेक परेशानियों का अंत हो जाता है और जीवन में खुशहाली आने लगती है।

Load Comments
Hide Comments
More News
आंध्र-प्रदेश
मुख्य समाचार
.