अधिक मास में करेंगे ये पांच काम तो खुल जाएगी किस्मत, प्रसन्न होंगे श्री हरि

19 Sep, 2020 08:17 IST|मीता
सोशल मीडिया के सौजन्य से

अधिक मास का महत्व

अधिक मास में करें ये शुभ काम 

जैसा कि हम जानते ही हैं इस बार पितृपक्ष के समाप्त होते ही नवरात्रि के बजाय अधिक मास शुरू हो गया है। अधिक मास के चलते पूरे एक महीने देर से शुरू होगी नवरात्रि। 
 अधिक मास आश्विन शुक्लपक्ष 18 सितंबर से आरंभ हो गया है जो आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या 16 अक्टूबर तक चलेगा।

अधिक मास को मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। इस मास में प्राणी श्रीहरि विष्णु की आराधना करके अपने जीवन में आने वाली सभी विषम परिस्थितियों, समस्याओं, कार्य बाधाओं, व्यापार में अत्यधिक नुकसान आदि से संकटों से मुक्ति पा सकता है। 

ज्योतिषियों की मानें तो आश्विन मास में 160 साल के बाद अधिकमास लगा है। इस मास की गिनती मुख्य महीनों में नहीं होती है। जब महीनों के नाम का बंटवारा हो रहा था तब अधिकमास उदास और दुखी था क्योंकि उसे दुख था कि लोग उसे अपवित्र मानेंगे।

ऐसे समय में भगवान विष्णु ने कहा कि अधिकमास तुम मुझे अत्यंत प्रिय रहोगे और तुम्हारा एक नाम पुरुषोत्तम मास होगा जो मेरा ही एक नाम है। इस महीने का स्वामी मैं ही रहूंगा। उस समय भगवान ने यह कहा था कि इस महीने की गिनती अन्य 12 महीनों से अलग है इसलिए इस महीने में लौकिक कार्य भी मंगलप्रद नहीं होंगे लेकिन कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्हें इस महीने में किए जाना बहुत ही शुभ फलदायी होगा और उन कार्यों का संबंध मुझसे होगा।

तो आप भी जानें कि इस महीने में कैसे कर सकते हैं श्री हरि को प्रसन्न जिससे आपकी हर मनोकामना पूरी होगी ....


- अधिक मास में श्रीहरि यानी भगवान विष्‍णु की पूजा करना सबसे श्रेष्‍ठ माना जाता है इसलिए अधिकमास में वैसे तो सभी प्रकार के शुभ कार्यों की मनाही होती है लेकिन भगवान सत्‍यनारायण की पूजा करना सबसे शुभफलदायी माना जाता है। अधिक मास में विष्‍णुजी की पूजा करने से माता लक्ष्‍मी भी प्रसन्‍न होती हैं और आपके घर में धन वैभव के साथ सुख और समृद्धि आती है।

- अधिक मास में ग्रह दोष की शांति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप करना सबसे श्रेष्‍ठ माना जाता है। बेहतर होगा कि आप किसी पुरोहित से संकल्‍प करवाकर महामृत्‍युंजय मंत्र का जप करवाएं। यदि कोरोना काल में ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है तो आप खुद से ही अपने घर में महामृत्युंजय मंत्र का जप करवाएं। ऐसा करने से आपके घर से सभी प्रकार के दोष समाप्‍त होंगे और आपके घर में सकारात्‍मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ेगा।

- अगर आप काफी समय से अपनी किसी मनोकामना को लेकर यज्ञ या अनुष्‍ठान करवाने के बारे में सोच रहे हैं तो अधिक मास का समय इस कार्य के लिए सर्वश्रेष्‍ठ है। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार, अधिक मास में करवाए जाने वाले यज्ञ और अनुष्‍ठान पूर्णत: फलित होते हैं और भगवान अपने भक्‍तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

- पुराणों में बताया गया है कि अधिक मास में भगवान विष्‍णु और उनके सभी अवतारों की पूजा करना सबसे उत्‍तम माना जाता है। अधिक मास के इन 30 दिनों में अक्‍सर लोग ब्रज क्षेत्र की यात्रा पर चले जाते हैं। हालांकि इस वक्‍त कोरोना काल में ब्रजभूमि की यात्रा करना थोड़ा मुश्किल भरा हो सकता है।   इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने घर में भगवान राम और कृष्‍ण की पूजा करें। इससे उत्‍तम फल की प्राप्ति होगी।

- अधिक मास में दान पुण्‍य के कार्य आपके लिए बैकुंठधाम का मार्ग प्रशस्‍त करते हैं। अधिक मास के दिनों में आपको विशेष रूप से गुरुवार के दिन पीली वस्‍तुओं का दान करना चाहिए। ऐसा करने से प्रभु श्रीहरि की कृपा आपको प्राप्‍त होती है और आपका गुरु भी बलवान होता है। गुरु के बलवान होने का अर्थ है कि आपको करियर में सफलता प्राप्‍त होगी।

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