सूर्य उपासना का पर्व है छठ जिसके धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक पहलू भी हैं, जानें इनके बारे में

19 Nov, 2020 09:47 IST|मीता
सोशल मीडिया के सौजन्य से

छठ महापर्व पर होती है सूर्य देव की विशेष पूजा 

छठ पूजा के धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक लाभ भी हैं 

दिवाली (Diwali) के बाद आता है छठ महापर्व (Chhath Puja) जिसकी तैयारियां दिवाली के बाद से ही शुरू हो जाती हैं। छठ पर्व चार दिनों का त्योहार है जिसमें सूर्य (Lord Surya)  उपासना की जाती है। माना जाता है कि सूर्य उपासना से जहां धन-धान्य के भंडार भरते हैं वहीं व्रत करने वाले लोगों की सेहत को भी कई तरह के फायदे होते हैं।

छठ महापर्व इस बार 18 नवंबर से शुरू हो गया है जो 21 नवंबर तक चलेगा। छठ महापर्व जहां धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है वहीं इसके कई वैज्ञानिक पहलू भी है। इसीलिए इस पर्व का महत्व बढ़ जाता है आइये यहां जानते हैं छठ महापर्व के वैज्ञानिक पहलू के बारे में ....

छठ महापर्व कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है और इसमें भगवान सूर्य की विशेष पूजा की परंपरा है। सूर्य पूजा जहां आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है वहीं इससे कई वैज्ञानिक लाभ भी होते हैं।

आइये यहां जानते हैं कि आखिर छठ पूजा से क्या लाभ होते हैं ....

- छठ पूजा का विधि-विधान व्रती के शरीर और मन को सौर ऊर्जा के अवशोषण के लिए तैयार करता है। बहुत कम ही लोगों को पता है कि छठ पूजा की इसी प्रक्रिया के जरिए प्राचीन भारत में ऋषि-मुनि बिना भोजन-पानी ग्रहण किए कठोर तपस्या करने की ऊर्जा प्राप्त करते थे।

छठ पूजा की विधि द्वारा ही वे भोजन-पानी से अप्रत्यक्ष तौर पर प्राप्त होने वाली ऊर्जा के बजाए सूर्य के संपर्क से सीधे ऊर्जा प्राप्त कर लेते थे।

- षष्ठी तिथि (छठ) एक विशेष खगोलीय अवसर होता है। इस समय सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती हैं। उसके संभावित कुप्रभावों से रक्षा करने का सामर्थ्य इस परंपरा में रहा है।

- माना जाता है कि अस्ताचलगामी और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान इसकी रोशनी के प्रभाव में आने से कोई चर्म रोग नहीं होता और इंसान निरोगी रहता है।

-अस्ताचलगामी और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान इसकी रोशनी के प्रभाव में आने से कोई चर्म रोग नहीं होता और इंसान निरोगी रहता है।

इस पूजन का वैज्ञानिक पक्ष ये है कि इससे सेहत से जुड़ी समस्याएं परेशान नहीं करतीं।

- वैज्ञानिक रूप से देखें तो इस माह में सूर्य उपासना से हम अपनी ऊर्जा और स्वास्थ्य का स्तर बेहतर बनाए रख सकते हैं।

- दिवाली के बाद सूर्यदेव का ताप पृथ्वी पर कम पहुंचता है। इसलिए व्रत के साथ सूर्य के ताप के माध्यम से ऊर्जा का संचय किया जाता है, ताकि शरीर सर्दी में स्वस्थ रहे।

- इसके अलावा सर्दी आने से शरीर में कई परिवर्तन भी होते हैं। खास तौर से पाचन तंत्र से संबंधित परिर्वतन। छठ पर्व का उपवास पाचन तंत्र के लिए लाभदायक होता है। इससे शरीर की आरोग्य क्षमता में वृद्धि होती है।

- छठ में दिए जाने वाले अर्घ्य का भी विशेष महत्व है। सुबह, दोपहर और शाम तीन समय सूर्य देव विशेष रूप से प्रभावी होते हैं, सुबह के वक्त सूर्य की आराधना से सेहत बेहतर होती है।

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तो देखा आपने कि किस तरह छठ पर्व सिर्फ धार्मिक रूप से ही नहीं वैज्ञानिक रूप से भी हमें कई तरह के लाभ पहुंचाता है।

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