कानपुर मुठभेड़ में डीएसपी समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद, बदमाशों ने घेर कर मारा

3 Jul, 2020 07:13 IST|Sakshi

कानपुर में बदमाशों के हमले में 8 पुलिसकर्मी शहीद

डीएसपी देवेंद्र मिश्रा समेज 8 पुलिसकर्मियों ने गंवाई जान

घटना के पीछे विकास दुबे गैंग का हाथ

कानपुर: बीती रात यहां कुख्यात अपराधी विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस पार्टी पर अपराधियों ने घेर कर हमला कर दिया। जिसमें डीएसपी देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं। डीएसपी देवेंद्र मिश्रा, एसओ और दो एसआई व चार जवानों ने इस हमले में जान गंवाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़े एक्शन का आदेश दिया है।

शहीद पुलिसकर्मियों के नाम 

1-देवेंद्र कुमार मिश्र, सीओ बिल्हौर
2-महेश यादव, एसओ शिवराजपुर
3-अनूप कुमार, चौकी इंचार्ज मंधना
4-नेबूलाल, सब इंस्पेक्टर शिवराजपुर
5-सुल्तान सिंह, कांस्टेबल थाना चौबेपुर
6-राहुल, कांस्टेबल बिठूर
7-जितेंद्र, कांस्टेबल बिठूर
8-बबलू, कांस्टेबल बिठूर

(घटना में डीएसपी देवेंद्र मिश्रा भी शहीद)

कानपुर के चौबेपुर थाना इलाके के विकरू गांव में दबिश देने पहुंची पुलिस टीम पर बदमाशों ने गोलियां चलाईं। जिसमें 8 शहादत के साथ ही एसओ बिठूर समेत 6 पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हैं। सभी घायल पुलिसकर्मियों को रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिनमें कुछ की हालत बेहद गंभीर बताई जाती है। 

मुठभेड़ में आठ जवानों को खोने के बाद यूपी की पुलिस जगह जगह दबिश दे रही है। DGP एचसी अवस्‍थी खुद घटनास्‍थल पर पहुंचने वाले हैं। एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार और बाकी आलाधिकारी मौके पर पहुंचे हुए हैं। 

घटना के पीछे विकास दुबे गैंग का नाम लिया जा रहा है। घटना के दौरान पुलिस पार्टी से हथियार भी  लूटे गए हैं। विकास दुबे वही शख्स है, जिसने थाने में घुसकर राज्यमंत्री की हत्या की थी। एडीजी कानपुर जोन, आईजी रेंज एसएसपी कानपुर समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर है। 

डीजीपी एचसी अवस्थी के मुताबिक अपराधियों ने घात लगाकर हमला किया है। हालांकि बदमाशों की संख्या करीब 7-8 ही बताई जाती है। जिनके पास अत्याधुनिक हथियार होने की आशंका जताई जा रही है। विकास दुबे को पकड़ने के लिए बिहार की सीमा पर भी गश्त तेज कर दी गई है। इसके अलावा कानपुर की सीमा को सील कर लगातार छापेमारी शुरू कर दी गई है। 

कौन है कुख्यात विकास दुबे?

विकास दुबे का नाम तब चर्चा में आया था जब उसने साल 2001 में राज्यमंत्री का दर्जा हासिल संतोष शुक्ला की थाने में घुसकर हत्या की थी। इससे पहले साल 2000 में कानपुर के शिवली थानाक्षेत्र के ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या भी उसी ने की थी। इसी साल हुई रामबाबू यादव की हत्या की साजिश का आरोप भी विकास दुबे पर ही लगा था। साल 2004 में केबल व्यवसायी दिनेश दुबे की हत्या का भी विकास दुबे पर ही आरोप है। 

विकास दुबे पर भाई को मरवाने की साजिश का आरोप

दो साल पहले विकास दुबे ने अपने चचेरे भाई अनुराग पर जानलेवा कराया था। बताया जाता है कि माती जेल में बैठकर उसने हत्या की साजिश रची थी। दरअसल अनुराग की पत्नी ने विकास समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसी बात को लेकर विकास खफा था। 

नेताओं के बीच गहरी पैठ है विकास दुबे की

विकास दुबे के आगे पुलिस की भी कई बार नहीं चली। जिसका कारण उसकी सियासत के बीच गहरी छनने की बात कही जा रही है। विकास दुबे की राजनीति में अच्छी पकड़ है और कई बड़े राजनेता उसके दोस्त बताये जाते हैं। 2002 में मायावती के राज में बिल्हौर, शिवराजपुर, रिनयां, चौबेपुर के साथ ही कानपुर नगर में उसकी तूती बोलती थी। जमीनों पर अवैध कब्जा करके उसने काफी संपत्ति भी बनाई है। जेल में रहते हुए भी वो आपराधिक वारदातों को अंजाम देता रहा है। विकास दुबे के ऊपर 60 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। 

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