आज से बदल रहा बहुत कुछ, आप की जेब पर पड़ सकता है सीधा असर

1 Sep, 2020 10:43 IST|Sakshi
फोटो : सौ. सोशल मीडिया

सिलेंडर की कीमतों में हो सकता है बदलाव

हवाई यात्रा का खर्च बढ़ेगा

नई दिल्ली : कोरोना महामारी के बीच सितंबर महीने से कई बदलाव होने जा रहा है। जिसका सीधा असर आप के जेब पर होगा। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर फाइनेंस तक से जुड़े है। इन बददलाव में अनलॉक 4 के नियम भी शामिल है। 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा घोषित लोन मोरेटोरियम अवधि 31 अगस्त को खत्म हो जाएगी। यानी वेतन कटौती और नौकरी गंवाने वाले लोगों को बड़ा झटका लगने वाला है। इसके अलावा एलपीजी गैस सिलेंडर, एयरलाइन किराया आदि से जुड़े नियम बदलने वाली हैं। आइए जानते हैं 1 सितंबर से किन नियमों में बदलाव होगा जिसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा।

खत्म होगी लोन मोरेटोरियम अवधि

कोरोनाकाल में लोगों को ईएमआई जैसे बड़े खर्चों से कुछ समय के लिए राहत देने के लिए आरबीआई ने मार्च में मोरेटोरियम अवधि शुरू की थी, जो 31 अगस्त को समाप्त हो रही है। मोरेटोरियम अवधि में लोगों के पास ईएमआई नहीं चुकाने का विकल्प था। ऐसे में ईएमआई फिर से शुरू होने से आपकी जेब पर बोझ बढ़ सकता है। आरबीआई ने ग्राहकों को राहत देने का अधिकार बैंकों को दिया है और इस पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) व पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की तरफ से अगले हफ्ते फैसला होने की संभावना है।

सिलेंडर की कीमतों में हो सकता है बदलाव

1 सितंबर से एलपीजी के दाम में बदलाव आ सकता है। हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव होता है। ऐसा माना जा रहा है कि कंपनियां एलपीजी (LPG), सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) कीमतें कम कर सकती हैं।  

हवाई यात्रा का खर्च बढ़ेगा

1 सितंबर से विमान सेवाएं महंगी हो सकती हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 1 सितंबर से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से उच्च विमानन सुरक्षा शुल्क (ASF) वसूलने का फैसला किया है। एएसएफ शुल्क के तौर पर घरेलू यात्रियों से अब 150 के बजाए 160 रुपए वसूला जाएगा, वहीं अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से 4.85 डॉलर के बदले 5.2 डॉलर वसूला जाएगा। यानी अंतर्राष्ट्रीय हवाई यात्रा करने पर करने  40 रुपये ज्यादा देने होंगे।

GST भुगतान में देरी होने पर शुल्क

वस्तु एवं सेवा कर के भुगतान में देरी की स्थिति में एक सितंबर से कुल टैक्स देनदारी पर ब्याज लगेगा। इस साल की शुरुआत में उद्योग ने जीएसटी भुगतान में देरी पर लगभग 46,000 करोड़ रुपये के बकाया ब्याज की वसूली के निर्देश पर चिंता जताई थी। ब्याज कुल देनदारी पर लगाया गया था। केंद्र और राज्य के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में निर्णय लिया था कि एक जुलाई, 2017 से कुल कर देनदारी पर जीएसटी भुगतान में देरी के लिए ब्याज लिया जाएगा और इसके लिए कानून को संशोधित किया जाएगा।

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