Corona Effect : मुर्गा लड़ाई पर छाया कोरोना का संकट

13 Jan, 2021 21:26 IST|संजय कुमार बिरादर
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अमरावती : हर साल पुलिस पर भारी पड़ने वाली मुर्गा लड़ाई की खबरें सुनने को मिलती थीं, लेकिन इस बार संक्रांति पर कोविड की चर्चा हो रही है। पुलिस की पाबंदियों के बीच संक्रांति पर तीन दिनों तक मुर्गा लड़ाई की परंपरा है। परंतु पहली बार इस साल कोरोना वायरस इस मुर्गा लड़ाई को चुनौती दे रहा है।संक्रांति पर तीन दिन तक चलने वाली मुर्गा लड़ाई पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों परिवार आधारित हैं।

मुर्गा लड़ाई में इस्तेमाल होने वाले चाकू, मुर्गे के पंख में बांधे जाने वाले चाकू, मुर्गा लड़ाई का मैदान तैयार करने वाले मजदूर ऐसे सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलता है। केवुल (कमिशन) लेकर मुर्गा लड़ाई की तैयार करने वाले आयोजक इन तीन दिनों का पूरा साल इंतजार करते हैं।

मुर्गा लड़ाई, जुआ, बंदरों का खेल आदि को अपना रोजगार बना चुके अनेक लोगों के लिए ये तीन दिन किसी त्योहार से छोटे नहीं होते। इसके अलावा मुर्गा लड़ाई और बंदरों के खेल के लिए बनने वाले मैदानों के पास बड़ी संख्या में स्टॉल्स बनाए जाते हैं, जिनमें कूल ड्रिंक्स से लेकर सिगरेट, पुलाव सेंटर, चिकेन बिरयानी सहित अन्य मांसाहारी भोजन मिलने वाले होटल और टिफिन सेंटर भी लगाए जाते हैं।

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इसके लिए जमीन का किराया, अनुमति देने के लिए आयोजकों को हर दिन के हिसाब से बड़े पैमाने पर वसूला जाता है। इस तरह, पूर्वी व पश्चिमी गोदावरी जिले में सैकड़ों परिवारों के लिए रोजगार, हजारों लोगों को जुए की लत तथा लाखों लोगों को मंत्रमुग्ध करने वाली मुर्गा लड़ाई के लिए इस बार कोविड महामारी चुनौती बन गई है।

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