अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस : क्या आपको पता है ये कब, क्यों और किसलिए मनाया जाता है

18 Nov, 2019 10:55 IST|मो. जहांगीर आलम
कान्सेप्ट फोटो

पुरुष दिवस की शुरूआत

पुरुष दिवस का इतिहास

हैदराबाद : महिला दिवस की तरह अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस भी होता है। यह दिवस पुरुषों को भेदभाव, शोषण, उत्पीड़न, हिंसा और असमानता से बचाने और उन्हें उनके अधिकार दिलाने के लिए मनाया जाता है। पुरुष दिवस हर साल 19 नवंबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इस दिन को मान्यता दी है

पुरुष दिवस की शुरूआत

पुरुष दिवस पुरुषों से जुड़ी समस्याओं पे चर्चा और विचार विमर्श हो सके इस लिए दुनिया भर में कुछ पुरुष इसे अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस के रूप में 19 नवंबर को मानते हैं। 1998 में त्रिनिदाद एंड टोबेगो में पहली बार 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया गया और इसका सारा श्रेय डॉ. जीरोम तिलकसिंह को जाता है।

उन्होंने इसे मनाने की पहल की और इसके लिए 19 नवंबर का दिन चुना। उनके इस प्रयास के बाद से ही हर साल 19 नवंबर को दुनिया भर के 60 देशों में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है और यूनेस्को भी उनके इस प्रयास की सराहना कर चुकी है।

भारत में पहली बार 2007 में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया गया और इसे पुरुषों के अधिकार के लिए लड़ने वाली संस्था ‘सेव इंडियन फैमिली’ ने पहली बार मनाया था।

पुरुष दिवस मनाना भी है जरूरी

आपको यह पढ़ने में आपको थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा, लेकिन यह सच है। महिलाओं की तरह पुरुष भी असमानता के शिकार होते हैं। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में होने वाली कुल आत्महत्याओं में 76 फीसदी पुरुष होते हैं। पूरी दुनिया में 85 फीसदी बेघर पुरुष हैं। यहां तक कि घरेलू हिंसा के शिकार लोगों में 40 फीसदी संख्या पुरुषों की है।

पुरुष दिवस का इतिहास

आपको बता दें कि अमेरिका के मिसौर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर थॉमस योस्टर की कोशिशों के बाद पहली बार 7 फरवरी 1992 को अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कुछ देशों ने अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस का मनाया था, लेकिन साल 1995 से कई देशों ने फरवरी महीने में पुरुष दिवस मनाना बंद कर दिया।

खास बात ये है कि कुछ साल पहले भारत में मौजूद All India Men's Welfare Association ने सरकार से एक खास मांग की और कहा कि वो महिला विकास मंत्रालय की तरह ही पुरुष विकास मंत्रालय भी बनाए, साथ ही राष्ट्रीय पुरुष आयोग का गठन हो, और लिंग समानता का मतलब समानता की तरह पेश करे।

नारी के बिना जीवन अधूरा है, लेकिन पुरुष भी उस जीवन को जीवंत बनाने में योगदान देते हैं। मां बच्चे को पेट में पालती है तो पिता भविष्य में आने वाली उसकी जरूरतों को दिमाग में पालता है। बतौर पिता, भाई, दोस्त, दादा, चाचा, मामा, नाना पुरुष कई किरदार हमारे-आपके जीवन में निभाते हैं, जिनकी काफी अहमियत होती है।

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