मां चंद्रघंटा की इस मंत्र से करें आराधना, कभी नहीं होगी धन की कमी

11 Oct, 2018 11:04 IST|Sakshi
देवी चंद्रघंटा

हैदराबाद : नवरात्रि के हर दिन मां के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां की मूर्ति स्थापित की जाती है। दूसरे दिन देवी के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की वंदना होती है। तीसरे दिन शक्ति के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा होती है।

नवरात्रि में तीसरे दिन की उपासना का अत्यधिक महत्व है और इस दिन देवी चंद्रघंटा के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है। इस दिन साधक का मन 'मणिपूर' चक्र में प्रविष्ट होता है। मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र बना होने के कारण इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। देवी के इस रूप की वंदना से समस्त कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही घर में कभी भी दरिद्रता नहीं आती है।

इस मंत्र से करें वंदना

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं।

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ऐसा माना जाता है कि देवी के इस रूप की पूजा करने से मन को अलौकिक शांति प्राप्त होती है और इससे न केवल इस लोक में अपितु परलोक में भी परम कल्याण की प्राप्ति होती है। इनके वंदन से मन को परम सूक्ष्म ध्वनि सुनाई देती है जो मन को बहुत शांति प्रदान करती है।

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